कठुआ। विद्यार्थियों को डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हायर सेकेंडरी स्कूल कीड़ियां में ”साइबर सुरक्षा” विषय पर एक विशेष जागरूकता व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को डिजिटल दुनिया में बढ़ते जोखिमों से अवगत कराना और सतर्कता बरतने के महत्व को समझाना था।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ने कहा कि वर्तमान दौर में इंटरनेट शिक्षा और ज्ञानार्जन का एक सशक्त माध्यम है, किंतु असावधानी और अज्ञानता की स्थिति में यह अत्यंत जोखिम भरा भी साबित हो सकता है। व्याख्यान के दौरान वक्ता ने डिजिटल सुरक्षा से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यार्थियों को फिशिंग, मैलवेयर, ऑनलाइन ठगी और साइबर बुलिंग (ऑनलाइन प्रताड़ना) जैसे सामान्य खतरों से सतर्क रहने के तरीके बताए गए। सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल खातों की सुरक्षा हेतु जटिल, विशिष्ट और यादृच्छिक पासवर्ड बनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया। अनजान व्यक्तियों के साथ व्यक्तिगत जानकारी, तस्वीरें और लाइव लोकेशन साझा न करने की सख्त सलाह दी गई। अनधिकृत पहुंच और डेटा चोरी से बचने के लिए खातों पर मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन सक्रिय करने की प्रक्रिया समझाई गई।
सत्र के समापन पर विद्यालय के प्रधानाचार्य ने ज्ञानवर्धक सत्र के लिए वक्ता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने साइबर निरक्षरता के वास्तविक उदाहरण साझा करते हुए विद्यार्थियों को चेताया और कहा कि वर्तमान तकनीकी युग में डिजिटल सतर्कता किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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साइबर अपराध के नए ट्रेंड और बचाव के उपाय
– डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड – फर्जी पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बनकर वीडियो कॉल पर डराना और कथित अपराध के नाम पर अवैध वसूली करना।
– एआई डीपफेक व वॉइस क्लोनिंग – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दुरुपयोग कर परिचितों की आवाज या चेहरे की नकल बनाकर आपात स्थिति के बहाने पैसों की मांग करना।
– वर्क फ्रॉम होम/टास्क स्कैम – टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर घर बैठे लाइक/रिव्यू के बदले भारी मुनाफे का लालच देकर निवेश के नाम पर ठगी।
– फर्जी एपीके फाइलें – व्हाट्सएप या मैसेज पर ई-चालान, पीएम योजना या शादी के कार्ड के नाम पर संदिग्ध फाइलें भेजकर फोन हैक करना।
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नागरिक जागरूकता व सुरक्षा नियम
1. किसी भी अनजान लिंक, क्यूआर कोड या एपीके फाइल को डाउनलोड या स्कैन न करें।
2. पुलिस या जांच एजेंसियां कभी भी डिजिटल या वीडियो कॉल के माध्यम से हिरासत में नहीं लेतीं।
3. किसी आपातकालीन कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने से पूर्व संबंधित परिजन से सामान्य कॉल कर पुष्टि अवश्य करें।
4. साइबर अपराध का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।