हीरानगर। चौबीस साल का लंबा वक्त गुजर जाने के बाद भी एक अक्टूबर 2002 की वह सुबह हीरानगर के लोगों की स्मृतियों से धुंधली नहीं हुई है। उस दिन आतंकियों की गोलीबारी के बीच अपनी जान गंवाने वाले लोगों की याद में गुरुवार को हीरानगर मोड़ स्थित गिरधारी लाल डोगरा चौक पर शहीदी दिवस मनाया गया।
युवा महासंघ हीरानगर की ओर से आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्ष धीरज गुप्ता सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, शहीदों के परिजन और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई। इसके बाद उनकी आत्मिक शांति के लिए हवन-यज्ञ किया गया।
एक अक्टूबर 2002 को आतंकियों ने हीरानगर मोड़ पर अचानक हमला कर दिया था। हमले के दौरान मौके पर मौजूद लोगों के बीच अफरातफरी मच गई थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने अपनी सुरक्षा की चिंता किए बिना दूसरों को बचाने का प्रयास किया और आतंकियों का सामना करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

इस आतंकी हमले में विक्रांत शर्मा, सतीश शर्मा, जनक राज, सांझी राम, चमन लाल, मोहिंदर पाल, कुलदीप सिंह और स्वर्ण कुमार सहित कई लोगों की जान चली गई थी। इनमें छह लोग हीरानगर क्षेत्र के रहने वाले थे, जबकि अन्य मृतक अलग-अलग क्षेत्रों से संबंधित थे।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए गए। उनके परिजनों को सम्मानित भी किया गया। परिवार के सदस्यों ने नम आंखों से अपने प्रियजनों को याद किया और कहा कि उनके बलिदान ने कई लोगों की जिंदगी बचाने का काम किया। उनके अनुसार आतंक के उस दौर में इन लोगों ने मानवता और साहस की मिसाल कायम की।
कार्यक्रम में धीरज गुप्ता ने कहा कि इन बलिदानियों को केवल एक दिन याद करना पर्याप्त नहीं है। उनकी बहादुरी और त्याग को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि युवा उस साहस और मानवता से प्रेरणा ले सकें, जो इन लोगों ने संकट की घड़ी में दिखाई थी।
उन्होंने कहा कि हीरानगर मोड़ पर शहीदों की स्मृति में स्मारक बनाए जाने की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि युवा महासंघ जनप्रतिनिधियों के समक्ष यह मुद्दा उठाएगा और जरूरत पड़ने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री से भी मुलाकात कर स्मारक निर्माण की मांग रखी जाएगी।
कार्यक्रम में संजय शर्मा, विजय कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे। शहीद परिवारों की ओर से विजय कुमार, राजेश कुमार, मनोहर लाल, सनी कुमार और किरण बाला सहित परिवार के अन्य सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए।
हवन-यज्ञ के बाद उपस्थित लोगों ने शहीदों की आत्मिक शांति के लिए प्रार्थना की और उनके बलिदान को नमन किया। चौबीस वर्ष बाद भी हीरानगर मोड़ पर उन लोगों की याद लोगों को यह संदेश देती रही कि आतंक के सामने खड़े होकर दूसरों की रक्षा करने वाले बलिदान कभी भुलाए नहीं जा सकते।