कठुआ। दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों से जुड़े मुद्दों को लेकर दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक, आदिवासी कंफेडरेशन (डोमा कंफेडरेशन) ने छठा चिंतन शिविर रविवार को बिलावर में आयोजित किया। इसमें तीन जिलों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
चिंतन शिवर की अध्यक्षता कंफेडरेशन के आरके कलसोत्रा ने की। चिंतन शिविर में आगामी जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र को देखते हुए विशेष रूप से दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों के अधिकारों, प्रतिनिधित्व तथा पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर चर्चा की गई। इस दौरान प्रतिभागियों ने अपनी मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया। शिविर में बनी, बसोहली, बिलावर, कठुआ, उधमपुर और जम्मू के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पदाधिकारी, कार्यकर्ता और प्रतिनिधि शामिल हुए। शिविर में तीन प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए। इनमें संबंधित समुदायों के लिए पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने, जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने तथा आगामी विधानसभा सत्र में पदोन्नति में आरक्षण संबंधी विधेयक पेश नहीं किए जाने की स्थिति में 28 सितंबर को श्रीनगर में विधानसभा घेराव करने का प्रस्ताव शामिल रहा।
कलसोत्रा ने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक दलों और विधायकों के रुख को सामने रखने का महत्वपूर्ण अवसर होगा। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल दलित, ओबीसी, अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों के कल्याण की बात करते हैं, उन्हें इस मुद्दे पर अपने रुख को कार्रवाई के माध्यम से स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने मांग की सरकार विधानसभा में आरक्षण बहाली से संबंधित विधेयक लाया जाए और समुदायों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर आगामी विधानसभा सत्र में कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो संगठन की ओर से घोषित कार्यक्रम के तहत 28 सितंबर को श्रीनगर में विधानसभा घेराव किया जाएगा। चिंतन शिविर में ज्योति प्रकाश, तिलक कजोत्रा, देव सोनी, रमेश चंद्र, कैप्टन हंस राज, डॉ. स्वरूप चंद, नरेश कुमार सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे।