एक दिवसीय किसान सम्मेलन में आधा दर्जन से अधिक प्रस्ताव पारित, स्मार्ट मीटर और बिजली निजीकरण का भी विरोध
कठुआ। जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक की ओर से एक दिवसीय किसान सम्मेलन किया गया, जिसमें किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा के बाद आधा दर्जन से अधिक प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में किसानों ने सरकार से कृषि क्षेत्र को राहत देने और उनकी आय व फसलों की सुरक्षा के लिए कई मांगें उठाईं।
कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर किसान तहरीक के अध्यक्ष कामरेड किशोर मुख्य रूप से मौजूद रहे, जबकि किसान यूनियन पंजाब के बलजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष बनारसी दास ने की। इस दौरान जिला वर्किंग अध्यक्ष कामरेड हरि सिंह, सचिव कामरेड सेवा राम सहित बड़ी संख्या में किसान तहरीक के पदाधिकारी और किसान उपस्थित रहे। सम्मेलन में किसानों ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कृषि उपज के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने की मांग की। किसानों ने कहा कि फसलों की लागत को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित मूल्य मिलना चाहिए, ताकि खेती को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाया जा सके। साथ ही किसानों को उनकी लागत के आधार पर एमएसपी उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई। किसानों ने बिजली विधेयक 2025 को खत्म करने की मांग करते हुए बिजली के निजीकरण को पूरी तरह बंद करने की बात कही। सम्मेलन में स्मार्ट मीटर लगाए जाने का भी विरोध किया गया और बिजली क्षेत्र को किसानों के हितों के अनुरूप रखने की मांग की गई। इसके अलावा किसान तहरीक ने सरकार से किसानों के एक बार के कर्ज माफ करने की मांग की। इसमें ट्रैक्टर लोन के साथ-साथ खेती के लिए लिए गए केसीसी ऋण को भी शामिल करने की मांग की गई। किसानों का कहना था कि जिस तरह सरकार बड़े कॉरपोरेट घरानों के हजारों-लाखों करोड़ रुपये के कर्ज माफ किए जाते हैं, उसी तरह किसानों को भी कर्ज के बोझ से राहत दी जानी चाहिए। इसके अलावा कंडी क्षेत्र में बंदरों के बढ़ते आतंक को भी सम्मेलन में प्रमुखता से उठाया गया। किसानों ने कहा कि बंदरों के कारण पिछले कई वर्षों से फसलों को नुकसान हो रहा है और कई किसान इनके डर से खेती तक नहीं कर पा रहे हैं। सम्मेलन में जिले और प्रदेश स्तर पर शुरू होने वाले धान खरीद केंद्रों पर उचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई, ताकि किसानों को 15-15 दिनों तक परेशानी का सामना न करना पड़े।
मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये दिहाड़ी की मांग
सम्मेलन में मनरेगा योजना को बहाल करने और रोजगार की गारंटी को मौजूदा 100 दिनों से बढ़ाकर 200 दिन करने की मांग की गई। इसके साथ ही मनरेगा की दिहाड़ी 700 रुपये करने का प्रस्ताव भी रखा गया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जो नई योजना लाई है, हम उसका विरोध करते है। क्योंकि इसमें रोजगार की कोई गारंटी नहीं है।
बीज विधेयक वापस लेने की मांग, नुकसान पर मुआवजे की बात
किसानों ने बीज विधेयक को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि महंगे बीजों के कारण यदि किसान की खेती प्रभावित होती है तो सरकार की ओर से उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों ने कृषि लागत लगातार बढ़ने पर चिंता जताते हुए खेती से जुड़े खर्च को कम करने की जरूरत पर भी जोर दिया।