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हीरानगर। सीमावर्ती गांवों के किसानों की जमीन से जुड़े मुआवजे का मामला एक बार फिर प्रशासन के सामने पहुंचा है। वीरवार को लौंडी और बोबिया गांवों के करीब 25 से 30 लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने सीमा कल्याण समिति हीरानगर के अध्यक्ष नानक चंद के नेतृत्व में उपमंडल प्रशासन से मुलाकात कर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल उपमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचा, लेकिन उस समय उपमंडल मजिस्ट्रेट कार्यालय में मौजूद नहीं थे। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने नायब तहसीलदार हीरानगर सरताज सिंह से मुलाकात की और उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत करवाया।
ग्रामीणों ने बताया कि सीमा सुरक्षा बल की ओर से सीमा पर बाड़ लगाने के लिए उनकी निजी कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया था। उनका कहना है कि जमीन अधिग्रहित किए जाने और बाड़ लगाने का काम पूरा होने के बावजूद प्रभावित भूमि मालिकों को अब तक बकाया मुआवजा नहीं मिला है।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन के समक्ष एक अन्य महत्वपूर्ण समस्या भी रखी। ग्रामीणों के अनुसार उनकी कृषि भूमि का कुछ हिस्सा सीमा बाड़ और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच स्थित है। बाड़ के दूसरी ओर होने के कारण यह जमीन खेती के लिए उनके लिए व्यावहारिक रूप से पहुंच से बाहर हो गई है।
किसानों ने दावा किया कि पिछले 26 वर्षों से इस जमीन के बदले उन्हें किसी प्रकार का किराया भी नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि पंजाब में सीमा बाड़ और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच स्थित कृषि भूमि के लिए किसानों को किराये का भुगतान किया जाता है। इसी व्यवस्था की तर्ज पर हीरानगर क्षेत्र के प्रभावित सीमावर्ती किसानों को भी किराया दिए जाने की मांग उन्होंने प्रशासन के समक्ष रखी।

प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से मांग की कि भूमि अधिग्रहण के लंबित मुआवजे को जल्द जारी करवाने के साथ-साथ सीमा बाड़ और अंतरराष्ट्रीय सीमा के बीच स्थित कृषि भूमि के लिए किराये की व्यवस्था भी लागू की जाए। किसानों ने कहा कि लंबे समय से लंबित इस मामले में प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि प्रभावित परिवारों को राहत मिल सके।
नायब तहसीलदार सरताज सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और समस्याओं को उपमंडल मजिस्ट्रेट हीरानगर के संज्ञान में लाकर आवश्यक विचार-विमर्श और कार्रवाई के लिए रखा जाएगा।