
ग्रामीणों ने सीमा के समीप स्थित कृषि भूमि तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाने पर जोर देते हुए लिफ्ट सिंचाई व्यवस्था शुरू करने की मांग रखी। ग्रामीणों का कहना था कि सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से सीमावर्ती क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों की आजीविका के साधन मजबूत होंगे।
अनिल कुमार सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पीडब्ल्यूडी की करीब 65 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जबकि लगभग इतनी ही राशि के विकास कार्य पाइपलाइन में हैं। उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम के दूसरे चरण में बोबिया और गजनल के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों को तय समय सीमा में पूरा करने का प्रयास किया जाएगा।
इस दौरान मन्यारी से भालसन-दा-खू सड़क के निर्माण की मांग भी प्रमुखता से उठी। एसीएस ने इस पर संज्ञान लेते हुए पीडब्ल्यूडी हीरानगर के अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उपायुक्त कठुआ राजेश शर्मा ने कार्यक्रम के उद्देश्यों और वीवीपी-2 के तहत प्रस्तावित विकास कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के दूसरे चरण में हीरानगर और मढ़ीन ब्लॉक के छह सीमावर्ती गांवों को शामिल किया गया है। संबंधित नोडल अधिकारियों ने बोबिया और गजनल की ग्राम विकास योजनाओं का खाका भी अधिकारियों के समक्ष रखा, जिसमें सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्य शामिल हैं।

दौरे के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त महिमा मदान, एसडीएम हीरानगर फुलैल सिंह, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, पीएमजीएसवाई व आरएंडबी के कार्यकारी अभियंता, नोडल अधिकारी तथा जिला प्रशासन के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। एसीएस ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि उनकी जायज मांगों पर संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।