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35 दिनों से अंधेरे में मंदिर परिसर, लंगर और टेंट लगाने की तैयारियां हो रहीं प्रभावित

ट्रस्ट ने अपनी जेब से खरीदकर पहुंचाया ट्रांसफार्मर, फिर भी बिजली आपूर्ति बहाल करने में नाकाम रहा विभाग

कठुआ। शारदीय नवरात्र के नजदीक आते ही बनी के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जौड़ियां माता भवन में गहराए बिजली संकट ने श्रद्धालुओं और मंदिर प्रबंधन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय से मंदिर परिसर में बिजली आपूर्ति ठप पड़ी है, जिससे निर्माण कार्यों सहित आगामी नवरात्र की तैयारियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। बिजली विभाग की इस कथित लापरवाही और सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय लोगों में गहरा रोष है।जौड़ियां माता मंदिर वेलफेयर ट्रस्ट के अध्यक्ष ठाकुर सुशील बांजलिया ने गहरी निराशा और चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि मंदिर परिसर में पिछले 30 से 35 दिनों से निर्माण एवं विकास कार्य चल रहे हैं। निर्माण कार्यों की गति बनाए रखने और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बिजली की सख्त आवश्यकता थी, लेकिन बिजली विभाग आज तक आपूर्ति बहाल करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। उन्होंने बताया कि विभाग की सुस्ती को देखते हुए स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए मंदिर कमेटी के सदस्यों ने अपनी निजी जमा-पूंजी खर्च कर खुद बिजली ट्रांसफार्मर का प्रबंध किया और उसे स्टेशन तक पहुंचाया। ट्रस्ट और स्थानीय समुदाय द्वारा इतना बड़ा प्रयास करने के बावजूद विभाग अभी तक उस सिस्टम को चालू करने और बिजली आपूर्ति बहाल करने में विफल रहा है। ठाकुर सुशील बांजलिया ने कहा कि कुछ ही दिनों में नवरात्र का पावन पर्व शुरू होने वाला है। विभिन्न धार्मिक कमेटियों ने दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए लंगर लगाने, टेंट लगाने और प्रकाश की व्यवस्था करने की तैयारियां शुरू कर दी हैं। ऐसे में बिजली आपूर्ति का न होना बहुत बड़ी चिंता का विषय है। यदि समय रहते बिजली बहाल नहीं की गई, तो नवरात्र के दौरान माता के दर्शन करने पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को भारी असुविधा और परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

 

ट्रस्ट के सदस्यों ने उच्चाधिकारियों और संबंधित विभाग से मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने कहा कि बिना किसी और देरी के जौड़ियां माता भवन में बिजली आपूर्ति को प्राथमिकता के आधार पर बहाल किया जाए, ताकि आगामी नवरात्र उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं को अंधेरे का सामना न करना पड़े और सभी धार्मिक गतिविधियां सुचारू रूप से संपन्न हो सकें।